Sunday, May 13, 2012

गांव गया था, गांव से भागा

गांव गया था गांव से भागा

गांव गया था
गांव से भागा
रामराज का हाल देखकर
पंचायत की चाल देखकर
आंगन में दीवाल देखकर
सिर पर आती डाल देखकर
नदी का पानी लाल देखकर
और आंख में बाल देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

गांव गया था
गांव से भागा
 सरकारी स्कीम देखकर
बालू में से क्रीम देखकर
देह बनाती टीम देखकर
हवा में उड़ता भीम देखकर
सौ-सौ नीम हकीम देखकर
गिरवी राम रहीम देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

गांव गया था
गांव से भागा
जला हुआ खलिहान देखकर
नेता का दालान देखकर
मुस्काता शैतान देखकर
घिघियाता इंसान देखकर
कहीं नहीं ईमान देखकर
बोझ हुआ मेहमान देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

गांव गया था
गांव से भागा
नये धनी का रंग देखकर
रंग हुआ बदरंग देखकर
बातचीत का ढंग देखकर
कुएं-कुएं में भंग देखकर
झूठी शान उमंग देखकर
पुलिस चोर के संग देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

गांव गया था
गांव से भागा।
बिना टिकट बारात देखकर
टाट देखकर भात देखकर
वही ढाक के पात देखकर
पोखर में नवजात देखकर
पड़ी पेट पर लात देखकर
मैं अपनी औकात देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

गांव गया था
गांव से भागा
नये नये हथियार देखकर
लहू-लहू त्यौहार देखकर
झूठ की जै-जैकार देखकर
सच पर पड ती मार देखकर
भगतिन का श्रृंगार देखकर
गिरी व्यास की लार देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

गांव गया था
गांव से भागा
मुठ्‌ठी में कानून देखकर
किचकिच दोनों जून देखकर
सिर पर चढ़ा जुनून देखकर
गंजे को नाखून देखकर
उजबक अफलातून देखकर
पंडित का सैलून देखकर
गांव गया था
गांव से भागा।

स्व. कैलाश गौतम

6 comments:

  1. जला हुआ खलिहान देखकर
    नेता का दालान देखकर
    मुस्काता शैतान देखकर
    घिघियाता इंसान देखकर
    कहीं नहीं ईमान देखकर
    बोझ हुआ मेहमान देखकर
    गांव गया था
    गांव से भागा।
    क्या कहने महेंद्र जी मजा आगया यह पोस्ट पढ़कर

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  2. आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १५ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

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  3. सपने में गिरा ..और ..
    नींद से जागा ...हा हा हा ..मजेदार !
    शुभकामनाएँ!

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  4. विसंगतियाँ देखकर भागने के सिवा और चारा ही क्या है?

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  5. गांव गया था
    गांव से भागा
    मुठ्‌ठी में कानून देखकर
    किचकिच दोनों जून देखकर
    सिर पर चढ़ा जुनून देखकर
    गंजे को नाखून देखकर
    उजबक अफलातून देखकर
    पंडित का सैलून देखकर
    गांव गया था
    गांव से भागा।अपने वक्त से संवाद करती बेहतरीन रचना .शुक्रिया आपका ..कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    शुक्रवार, 8 जून 2012
    फिरंगी संस्कृति का रोग है यह
    प्रजनन अंगों को लगने वाला एक संक्रामक यौन रोग होता है सूजाक .इस यौन रोग गान' रिया(Gonorrhoea) से संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क स्थापित करने वाले व्यक्ति को भी यह रोग लग जाता है .
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  6. जब आपने ये कविता मेरा साथ साँझा की थी तब भी और आज इसे ऐसे यहाँ पढ़ा कर ...और भी अच्छा लगा .....कवि ने कितने सार्थक शब्दों में हर बात को सबके सामने रख दिया हैं ...बहुत उम्दा ..***** फुल५ सितारे हैं इसके लिए

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