करें परिवेश का मंथन, मिलेगा सत्य शिव सुंदर,
हलाहल भी अगर निकले, पिएं बन सौम्य शिव शंकर।
मिटे संशय अनास्था तम् , मिटे विद्वेष और जड़ता,
कुहासे में दबे रवि की, पुन: बिखरे सहज ममता।
सुधा हो तन, सुधा हो मन, सुधा चिंतन, सुधा वाणी,
सुधा अपना, सुधा सबका, सुधा हो विश्व कल्याणी।
उठो! ऐ देव संतानों, सुनों कुछ कह रहा कण-कण,
सुधा बन जाए मंथन का, सुनहरा वर्ष ये नूतन।
नव वर्ष मंगलमय हो,
स्वागत 2012
