Friday, January 20, 2012

आर्म्स दलालों के निशाने पर हैं जनरल ...

नरल वी के सिंह के जन्मतिथि के विवाद से जुड़ा मसला और उलझता जा रहा है। हालाकि सरकार के पास अभी भी वक्त है कि इस मामले को कोर्ट के बाहर निपटा ले।  क्योंकि कोर्ट में सरकार के जीतती है तो भी उसकी हार होगी और हार जाने पर तो हार है ही। आप सब जानते हैं कि देश में जन्मतिथि के लिए हाईस्कूल के प्रमाण पत्र को मान्यता मिली हुई है। यानि जो लोग भी पढे़ लिखे हैं, वो सभी जगहों पर हाईस्कूल के प्रमाण पत्र को ही जन्मतिथि के लिए इस्तेमाल करते हैं। बात चाहे नौकरी की हो, या फिर बैंक एकाउंट, पासपोर्ट, स्कूल कालेज कहीं भी जन्मतिथि की जरूरत हो, यही प्रमाण पत्र मान्य होता है। जनरल वी  के सिंह के हाईस्कूल के प्रमाण पत्र में उनकी जन्मतिथि 10 मई 1951 है। इसी प्रमाण पत्र को मुख्य आधार बनाकर जनरल साहब कोर्ट पहुंचे हैं। अगर जनरल जीत गए फिर तो सरकार को मुंह की खानी ही पड़ेगी, अगर सरकार जीत गई, तब तो वो और बड़ी मुश्किल में फंस जाएगी। क्योंकि इसके बाद देश में हाईस्कूल के प्रमाण पत्र की मान्यता पर सवाल खड़े हो जाएंगे और कहा जाएगा कि अगर जनरल वी के सिंह का हाईस्कूल प्रमाण पत्र गलत हो सकता है तो और किसी का क्यों नहीं गलत हो सकता। सरकारी नौकरी में विवाद खड़ा करने के लिए लोग एक दूसरे की सर्विस बुक की जन्मतिथि में छेड़छाड़ करने लगेंगे, पदोन्नत के मामले में आईएएस और आईपीएस अफसरों की जन्मतिथि में छेड़छाड़ शुरू होने लगेगी। हाईस्कूल के प्रमाण पत्र को इसी आधार पर खारिज कर दिया जाएगा कि जनरल साहब का भी प्रमाण पत्र गलत था। जनरल वी के सिंह इस साल रिटायर हों या अगले साल ये ज्यादा मायने नहीं रखता, लेकिन कुछ भ्रष्ट अफसर किस तरह आर्म्स दलालों के साथ मिलकर सेनाध्यक्ष जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को घेरे में ले लेते हैं, ये एक ऐसा उदाहरण बन जाएगा, जिसकी काली छाया से निकलना आसान नहीं होगा। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि एक लाबी जनरल को हटाने के लिए अब तक देश में कई सौ करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और इस गोरखधंधे में सैन्य अफसर, नौकरशाह, सफेदपोश सभी के हाथ सने हुए हैं।     

5 comments:

  1. इसे क्या कहेंगे - स्वार्थ की जीत के लिए किसी को कहीं भी मार देना

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  2. अफसोसनाक है यह घटना।
    इस मुद्दे पर जनरल का यह बयान कि उनके साथ पाक सेनाध्‍यक्ष जैसा बर्ताव हो रहा है, यह तो और भी दुर्भाग्‍यजनक है सरकार के लिए।

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  3. aj ke bharat me sabkuchh sambhav hai shrivastav ji

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  4. sach me isthiti badi badtr ho rhi hai.

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  5. बिचौलियों का धन्धा हर जगह उफ़ान पर है।

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