Wednesday, July 10, 2013

फेसबुक पर Like खरीदते हैं मुख्यमंत्री !

कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों का भी बुरा हाल है। क्या करें, क्या ना करें, ये बात उनकी समझ में ही नहीं आ रही है। कामयाबी के लिए राज्य की जनता के दुखदर्द में शामिल हों या फिर सोशल साइट पर "लाइक" की संख्या बढ़ाकर लोकप्रियता के नए पैमाने पर सबसे आगे खड़े हो जाएं, वो ये तय नहीं कर पा रहे हैं। अब कांग्रेसियों ने देखा कि नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री तो गुजरात के हैं, लेकिन उनकी छवि एक राष्ट्रीय नेता की बन चुकी है, इसमें सोशल नेटवर्किंग साइट्स का अहम योगदान है। इसलिए मोदी की देखा देखी कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल साइट्स पर ग्रुप बनवाया, अब  "लाइक्स" की संख्या बढ़ाने के लिए सौदेबाजी पर उतर आए, लेकिन क्या करें, बेचारे अपने ही जाल में फस गए। गहलौत साहब लोकप्रियता खरीदी नहीं जा सकती, समझ में आई बात !

पूरा किस्सा सुन लीजिए , सोशल मीडिया पर जारी सियासत ने राजस्‍थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत की खूब फजीहत हो रही है।  आरोप है कि वो अपनी शोहरत यानि लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए आधिकारिक फेसबुक पेज के लिए 'लाइक्स खरीदने' में जुट गए हैं। वैसे तो ये काम छोटे मोटे लोग भी करते हैं, इसका फेजबुक पर बकायदा प्राविजन है। अब गहलोत ने अपने फेसबुक पेज का जिम्मा एक अलग हाईटेक टीम के हवाले कर रखा है। बताते हैं कि इस उनके इस पेज पर 1 जून तक 1,69,077 लाइक्स मिले हुए थे। इसमें भी ज्यदातर लाइक्स 5 मई वाले हफ्ते में आए हुए हैं।

अब हैरानी इस बात को लेकर है कि महज एक महीने यानि 30 जून तक ये आंकड़ा उछलकर 2,14,639 पर कैसे पहुंच गया ? इतना ही नहीं पहले मसलन एक जून तक गहलौत की " मोस्ट पापुलर सिटी " यानि गहलौत साहब कहां सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं, कहां उनके ज्यादा फालोवर हैं,  ये सब जयपुर था। लेकिन अचानक "लाइक्स" की संख्या बढ़ने के बाद उनकी पापुलेरिटी जयपुर के बजाए " इंस्ताबुल " हो गया, जो तुर्की की राजधानी है। हाहाहहाहाहा। मतलब भाई गहलौत जी अब तुर्की में ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं। 

अब विरोधी भी तो मौके की तलाश में रहते है। बीजेपी नेता किरण ने मुख्यमंत्री पर सवाल खड़े कर दिए।  उनका कहना है कि गहलोत की आखिर इंस्ताबुल में इतनी चर्चा कैसे हो सकती है ? उन्होंने आरोप लगाया कि ये लाइक्स इंस्ताबुल की किसी आईटी कंपनी से खरीदे गए हैं। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सोशल मीडिया पर भी गलत छवि पेश कर रही है। कहते हैं ना कि हर जगह टांग नहीं फंसाना चाहिए, अब मुख्यमंत्री ठहरे ठेठ राजस्थानी, कंपूटर को उन्होंने कभी हाथ नहीं लगाया होगा, फून में भी बहुत सामान्य वाला इस्तेमाल करते हैं। अब टाई लगाकर उन्हें आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है। भाई गहलौत जी आप जैसे हैं वैसे ही ठीक हैं, कहीं टाई के चक्कर में पगड़ी में उतर जाए ?







25 comments:

  1. ha ha ha ha .ab to bure fase gahlot ji....

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    1. अरे ये सब नेता है, कोई फंसने वाला नहीं

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  2. लोकप्रियता के लिए क्या क्या करना पड़ता है लेकिन गहलोत महोदय भूल गए कि इस्ताम्बुल वाले नहीं राजस्थान वाले ही चुनावों में वोट डालेंगे !!

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    1. हाहाहहाहाहहा, यही तो फंस गए बेचारे

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  3. लोकप्रियता के लिए लोकप्रिय होना जरूरी होता है ,,

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    1. जी, ये तो सही है, लेकिन लोकप्रिय राजस्थान में हो तो अच्छा है। तुर्की से क्या फायदा..हाहाहहा

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  4. गहलोत साहब जी अच्छा काम करिए खुद पब्लिक लाइक करेगी लाइक खरीदने की क्या जरुरत है.... बहुत घटिया काम......

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    1. जी, अब ये बात गहलौत जी के समझ में क्यों नहीं आ रही है..
      आभार

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  5. शुभ प्रभात
    एक कड़ुआ सच उजागर किया आपने
    यही हाल रायपुर के एक नेता का भी है

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    1. जी नमस्ते
      अच्छा, ये रोग रायपुर में भी है।
      बहुत बढिया

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहस्पतिवार (11-07-2013) को चर्चा - 1303 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. बस हाय! हाय! करने को जी करता है..

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  8. यह भी खूब रही!
    कुर्सी का लालच जो न कराए कम है!

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    1. जी, देख लीजिए नेता लोगों को क्या क्या करना पड़ता है,
      लोग कहते हैं कि नेतागिरी बहुत आसान है..मैं तो नहीं मानता।

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    2. aj to jhakhmari bhi asan nahi

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    3. asan to aj jakmari bhi nahi

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  9. हम तो बिना पैसा लिए ही लाईक कर देते हैं...:)

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    1. सही बाबा , हम तो इस बारे में सोचते भी नहीं है।
      हाहाहहा

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  10. बेचारा-
    नक़ल के लिए भी अकल चाहिए-
    बढ़िया है आदरणीय-

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  11. काश हम भी मुख्मंत्री होते ...!!!

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