Monday, March 18, 2013

एयर इंडिया के सभी सुरक्षा अधिकारी फेल !

विदेशों में सुरक्षा ऐसे होती है !
सुबह अखबार की एक खबर ने नींद उड़ा दी। हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था परखने के लिए व्यूरो आफ सिविल एवीएशन सिक्योरिटीज यानी बीसीएएस ने एयर लाइंस के अफसरों की परीक्षा ली, इस परीक्षा में एयर इंडिया के सभी 21 सीनियर अफसर फेल हो गए। इसके अलावा स्पाइस जेट के 4 और डायल के 18 अधिकारी भी फेल हो गए। ये हाल तब है जब हैदराबाद ब्लास्ट के बाद पूरे देश में रेड अलर्ट घोषित है, इसके तहत हवाई अड्डों की तो खासतौर पर चौकसी बढ़ाई गई है। आसानी से समझा जा सकता है कि जब अलर्ट के दौरान ये हाल है तो सामान्य दिनों में तो भगवान ही मालिक है। 

आपको बता दूं कि हवाई अड्डों की सुरक्षा को लेकर केवल भारत सरकार ही नहीं बल्कि दुनिया भर की सरकारें काफी गंभीर रहती हैं। क्योंकि कहीं भी अगर कोई लापरवाही हो गई तो हवाई जहाज के जरिए संदिग्ध व्यक्ति कहीं भी जा सकता है। इसलिए  विभिन्न एयbfर लाइंस की सिक्योरिटी विंग और सीआईएसएफ  के अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी सौंपने के पहले एक 15 दिन की परीक्षा ली जाती है। जिससे ये पता चल सके कि जिन अफसरों को लगाया गया है वो सुरक्षा संबंधी नियमों और बारीकियों से वाकिफ हैं या नहीं। 

हैरानी की बात ये है कि कुछ दिन पहले हुई परीक्षा में एयर इंडिया के 21 अफसर शामिल हुए, जिसमें सभी फेल हो गए। डायल एयरलाइंस के 20 अफसरों में 18 फेल हो गए, जबकि स्पाइस जेट के 7 अफसरों मे चार फेल हो गए। सबसे बड़ी बात कि सभी हवाई अड्डों की सुरक्षा इन दिनों सीआईएसएफ के पास है, इसके 35 अफसरों ने परीक्षा दी, जिसमें 22 फेल हो गए। परीक्षा में खासतौर पर टर्मिनल के प्रवेश और निकास, इन लाइन बैगेज सिस्टम, फ्रिक्सिंग, एक्सरे और बोर्डिंग गेट आदि शामिल हैं। आप जानते ही हैं कि इनमें से कहीं भी चूक हुई तो उसके कितने गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

इसके पहले एक परीक्षा आठ से 21 जनवरी 13 के बीच हुई थी। इसमे एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइस जेट और सीआईएसएफ के कुल 103 सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। पता है 103 में 97 अफसर फेल हो गए। जब हवाई अड्डे की सुरक्षा का ये हाल है तो आप यहां रेलवे स्टेशन या फिर बस स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था का हाल आसानी से समझ सकते हैं। मुझे लगता है कि अब सुरक्षा का मामला वाकई भगवान के हवाले कर देना चाहिए, कहां तक इतना टेंशन लेकर सफर किया जाएगा। मैं कुछ तस्वीरें दे रहा हूं, जिससे आपको आसानी से समझ मेंआ जाएगा  कि विदेशो में इस मसले को लेकर सिक्योरिटी कितनी गंभीर है। विदेशियों की सुरक्षा के मुकाबले अगर हम अपने एयरपोर्ट पर तैनात अफसरों और कर्मचारियों की तस्वीर  दिखाएं तो हम खुद ही समझ जाएंगे कि हमारी सुरक्षा वर्ल्ड क्लास है ही  नहीं। 

सीआईएसएफ का जवान एके 47 लेकर ऐसा दिखाई देगा, जैसे वो अभी आतंकियों की धर पकड़ कर उन्हें सबक सिखाने को तैयार बैठा है। पर सच बताऊं  मौका पड़ने पर पता नहीं उसकी ये एके 47 चलेगी भी या नहीं इसे लेकर भी संदेह है। चलिए जरा ये तस्वीर देखिए भारतीय जवान की। 




 देखिए ! बेचारा खड़ा भी नहीं हो पा रहा !











ये विदेशी सुरक्षा जांच है ...







देखिए कितनी गंभीरता है सुरक्षा जांच में !








ऐसी जांच हो तभी अनहोनी से बच सकते  हैं !












  माफ कीजिएगा, ये कुंभ स्नान की तस्वीर नहीं है। एयर पोर्ट पर ही सुरक्षा कारणों से लोगों ने जांच के लिए कपड़े उतारे हैं। पुरुष हो या महिला किसी को छूट नहीं !








आपको याद होगा, अमेरिका में  अभिनेता शाहरुख खान को सुरक्षा एजेंसियों ने रोक कर  जांच कर लिया तो   पूरे देश में हाय तौबा मच गया। इसमें ऐसी क्या बात हो गई अगर सुरक्षा एजेंसी ने किसी को रोक कर जांच कर लिया ? मुझे लगता है कि विदेशियों से ये सीखना  चाहिए, बेवजह का स्वाभिमान ठीक नहीं, खासतौर पर सुरक्षा के मामले में। हमें खुद आगे आना चाहिए और एंजेसियों का सहयोग करना चाहिए। 








Tuesday, March 12, 2013

समाजवादी चाचाओं के चंगुल में सीएम !

सच बताऊं मुझे मुलायम सिंह यादव के बेटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से काफी उम्मीदें थीं। मुझे लग रहा था कि यूपी की घटिया राजनीति से खुद को अलग रखते हुए अखिलेश ऐसा कुछ करेंगे, जिससे सूबे का भला तो होगा ही, देश को नौजवान नेता पर भरोसा होगा और आगे नौजवानों को नेतृत्व मिलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। पर मुझे तो अखिलेश ने बहुत निराश किया है। मैं पूछना चाहता हूं कि अगर सरकार मुलायम सिंह, आजम खां और शिवपाल यादव समेत अन्य बजुर्ग नेताओं की सलाह पर ही चलनी है तो फिर खुद मुलायम सिंह में क्या बुराई है। वही कुर्सी पर बैंठे और अपने तरीके से सरकार चलाएं। अखिलेश दिन भर समाजवादी चाचाओं और मीडिया के दिखाए रास्ते पर आंख बंद करके दौड़ लगाते रहते हैं। मुझे तो आज तक एक काम भी ऐसा नहीं दिखा, जिससे लगे की इनमें नेतृत्व की क्षमता है।
 
बताइये अगले साल होने वाले चुनाव में युवाओं को लुभाने के लिए बेरोजगारों को एक हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता बांटा जाना था। कई जगह समारोह आयोजित कर ये चेक युवाओं को थमाए भी गए और खूब फोटोबाजी हुई। लगातार अखबारों में विज्ञापन देख लखनऊ की आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी को लगा कि पता किया जाना चाहिए कि आखिर सरकार में चल क्या रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि अब तक कितने बेरोजगारों को कितना धन बांटा गया है और इस आयोजन में कितने पैसे खर्च हुए हैं। जानकारी चौकाने वाली है। जो जवाब उर्वशी को मिला, उसके मुताबिक पिछले साल मार्च से नवंबर के बीच कुल 8.5 करोड़ रुपये प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता बांटा गया है जबकि इस धनराशि के को बांटने के लिए आयोजित समारोह पर 12.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ये धनराशि 10,500 युवाओं में बांटी गई है।

बताइये साहब अब अखिलेश जिनकी तुलना लोग कांग्रेस के राहुल गांधी से करते थे और बताते थे कि अखिलेश अमूल बेबी नहीं है। उनका जोड़ घटाना पक्का है। लेकिन इस हिसाब तो सच में अखिलेश का गणित बहुत कमजोर है। अब इसे क्या कहें, बेरोजगारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता या फिर वोटों की राजनीति। आप  सब जानते हैं कि समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यूपी के बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 1000 तब तक देने का वादा किया है, जब तक कि उन्हें नौकरी नहीं मिल जाती। इसके लिए युवाओं की उम्र सीमा तय कर दी गई है। राज्य के 25-40 उम्र सीमा के बीच के युवाओं को इस भत्ते को पाने कि लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराना था। जिसके बाद अखिलेश सरकार उन्हें प्रति माह हजार रुपए का भत्ता देगी। लेकिन भत्ते से ज्यादा राशि तो उन क्रायक्रमों पर खर्च कर दिया जा रहा है। ऐसे में भला यूपी का विकास कैसे हो सकता है। भाई अखिलेश जी, आंखे खोलिए, वरना देश में युवा नेतृत्व पर सवाल खड़े होने लगेंगे। वैसे ही अनाप शनाप बोल कर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला  युवाओं की किरकिरी करा चुके हैं।


Monday, March 4, 2013

बीस लाख का बलात्कार !

बलात्कार के मामले में भी केंद्र की सरकार नपुंसक.. ओह इस शब्द पर मेरे विद्वान मित्रों को ऐतराज हो सकता है, चलिए मैं पूछता हूं कि इस गंभीर मामले में भी सरकार मनमोहन सिंह क्यों बनी हुई है ? अच्छा मैं मनमोहन सिंह को तो लुजलुजा पीएम पहले से ही समझता रहा हूं, लेकिन वित्तमंत्री पी चिदंबरम को क्या हो गया है ? चिदंबरम तो गृहमंत्री भी रह चुके हैं और अब वित्तमंत्री हैं। उन्हें पता है ना कि कहां डंडा चलाया जाता है और कहां संवेदना व्यक्त की जाती है। सरकार, नेता, मंत्री सबकी आंखो में एक ही चश्मा क्यों होता है ? बलात्कार की खबर मिलते ही सबसे पहले सरकारी खजाना खोला जाता है और पीड़ित परिवार को रंग बिरंगे  नोट  में तौलने की कोशिश होती है। 

मैं महिलाओं का बहुत सम्मान करता हूं और इस सवाल का जवाब उन्हीं से जानना चाहता हूं। बताइये ! इस बलात्कार और उस बलात्कार में फर्क कैसे हो सकता है ? दिल्ली की बस में हुए बलात्कार का मुआवजा 20 लाख और डीडीए का फ्लैट और गांवो के खेत मे हुए बलात्कार का मुआवजा तो दूर रिपोर्ट दर्ज नहीं होती। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अभी दिल्ली बलात्कार शिकार के परिवार वालों से पूछें कि उन्हें मुआवजा चाहिए या फिर बलात्कारियों को सख्त सजा। उनका जवाब नि:संदेह यही होगा कि वो बलात्कारियों को सख्त सजा चाहते हैं। लेकिन शीला की सरकार है और चुनाव आने वाले हैं तो इन्हें लगता  है कि  इतना मुआवजा दे दो कि लोग बलात्कार की घटना भूल जाएं और सरकार की रहम यानि भीख को याद रखें। 

मैडम सोनिया जी अगर वित्तमंत्री ने आम बजट में निर्भया फंड का ऐलान ना किया होता सिर्फ आपने संसद को ये विश्वास दिलाया होता कि निर्भया बलात्कार के दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी और बेटी निर्भया के नाम पर फंड बनाने के बजाए कानून बनाया होता तो शायद देश की महिलाएं आपको ज्यादा सम्मान की नजर से देखतीं। लेकिन आप और आपकी सरकार को सजा में नहीं मुआवजे पर ज्यादा भरोसा है। थू........ 

Sunday, November 4, 2012

बौड़म गड़करी का बड़बोलापन

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गड़करी अब अपना संतुलन खो बैठे हैं। भोपाल में रविवार को महिलाओं के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जब उन्होंने स्वामी विवेकानंद की तुलना माफिया दाउद इब्राहिम से की तो लोग हैरान रह गए। गड़करी ने कहाकि स्वामी विवेकानंद और माफिया दाउद इब्राहिम दोनों का ही आईक्यू स्तर बराबर है। फर्क बस इतना है कि विवेकानंद ने अपने आईक्यू का इस्तेमाल देश के निर्माण में लगाया जबकि  दाऊद ने अपराध में। स्वामी विवेकानंद और दाउद के आईक्यू को एक जैसा बता कर गड़करी क्या साबित करना चाहते थे ? ये तो वही बता सकते हैं, लेकिन वहां मौजूद लोगों में किसी को ये बात समझ में नहीं आई। महिलाओं के कार्यक्रम दाउद की चर्चा आखिर क्यों ? मुझे तो लगता है कि गड़करी बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी खिसकती देख पटरी से उतर गए हैं। वैसे मेरा मानना है कि गड़करी का आईक्यू भी दाउद से कम नहीं है, जो एक छोटे से कार्यकर्ता होकर पार्टीध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच गए। एक  कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरे के लिए रास्ता साफ करा लिया, जबकि उनसे तमाम वरिष्ठ पार्टी नेता अभी तक इंतजार कर रहे हैं।

मुझे तो लगता है कि गड़करी की जुबान फिसली नहीं है, बल्कि इस बयान के पीछे गड़करी की गहरी साजिश है। दरअसल आजकल देश भर में जब भी गड़करी की बात होती है तो उनके भ्रष्टाचार की चर्चा हो रही है। नितिन इससे परेशान हो गए हैं। सच्चाई ये भी है कि उन्हें बीजेपी अध्यक्ष का दूसरा कार्यकाल देने का रास्ता भी साफ कर लिया गया था,  पर जिस तरह उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं, उससे अब उनका दोबारा अध्यक्ष बनना भी मुश्किल हो गया है। नितिन से संघ का भी मोह भंग होता दिखाई दे रहा है। लगता है कि इसी वजह से गड़करी उटपटांग कुछ भी बोल रहे हैं, जिससे लोगों का ध्यान उनके भ्रष्टाचार से से हट जाए। विवाद में तो वो रहें, लेकिन बात विवेकानंद और  दाऊद की हो। अगर गडकरी की ये सोच है तो एक राष्ट्रीय पार्टी के लिए वाकई ये गंभीर मसला है। 

मेरा तो गड़करी को सुझाव होगा कि बिना देरी  किए अपने इस वक्तव्य पर देश से माफी मांगकर इस विवाद को यहीं खत्म कर दें। वरना उन्हें भी लोग बडबोला गड़करी कहकर गंभीरता से लेना ही बंद कर देंगे। मैं तो यही मानता हूं कि देश को शर्मशार किया है नितिन गड़करी ने।  


एक जरूरी सूचना :-

मित्रों आपको पता है कि मैं इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडा हूं। दिल्ली में रहने के दौरान सियासी गलियारे में जो कुछ होता है, वो तो मैं सबके सामने बेबाकी से रखता ही रहता हूं और उस पर आपका स्नेह भी मुझे मिलता है। अब लगता है कि आप में से बहुत सारे लोग टीवी न्यूज तो देखते हैं, लेकिन इसकी बारीकियां नहीं समझ पाते होगें। मैने तय किया है कि अब आपको मैं टीवी फ्रैंडली बनाऊं। मसलन टीवी के बारे में आपकी जानकारी दुरुस्त करुं, गुण दोष के आधार पर बताऊं कि क्या हो रहा है, जबकि होना क्या चाहिए। इसमें मैं आपको इंटरटेंनमेंट चैनल को लेकर भी  उठने वाले सवालों पर बेबाकी से अपनी राय रखूंगा। मेरी नजर प्रिंट मीडिया पर भी बनी रहेगी। इसके लिए मैने  एक नया ब्लाग बनाया है, जिसका नाम है TV स्टेशन ...। इसका URL है।   http://tvstationlive.blogspot.in । मुझे उम्मीद है कि मुझे इस नए ब्लाग पर भी आपका स्नेह यूं ही मिता रहेगा।   

Tuesday, October 9, 2012

सोनिया के दामाद या सरकार के ?

मुझे एक सवाल का जवाब चाहिए। वैसे तो जवाब प्रधानमंत्री को ही देना चाहिए, भले जवाब देने के पहले वो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विचार विमर्श कर लें। मेरा सवाल है कि व्यवसायी राबर्ट वाड्रा आखिर किसके दामाद हैं ? चलिए आपको जवाब देने में मुश्किल ना हो इसलिए आप्सन भी दे देता हूं।

ए.  सरकार के , बी. कांग्रेस पार्टी के, सी. सोनिया गांधी के और डी. यूपीए गठबंधन के

ये सवाल इस लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राबर्ट पर आरोपों का जवाब सरकार के मंत्री दे रहे हैं। वित्तमंत्री पी चिंदरबरम, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद, राजीव शुक्ला, अंबिका सोनी समेत कुछ और मंत्री रावर्ट के पीछे मजबूती से खड़े हैं। इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि रावर्ट सरकार के दामाद हैं क्या ? क्यों ये सारे मंत्री बिना जांच के रावर्ट को क्लीन चिट दे रहे हैं। अच्छा सरकार के मंत्री के साथ कांग्रेस के नेता भी रावर्ट के मामले में इस तरह बयान दे रहे हैं, जैसे रावर्ट की कंपनी का लेखाजोखा कांग्रेस दफ्तर में ही तैयार होता है। अच्छा कांग्रेस के नेता अगर रावर्ट को क्लीन चिट देते हैं तो बात समझ में आती है। ना जाने क्यों यूपीए गंठबंधन में शामिल एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार भी उनके साथ खड़े हैं। आखिर ऐसा क्या है? सब एक ही भाषा बोल रहे हैं।

सच कहूं तो  जो मामले सामने आए हैं, उससे इतना तो साफ है कि वाड्रा की कमीज बेदाग तो बिल्कुल नहीं है। वाड्रा साहब अगर आपको अपनी साख की फिक्र है तो आप खुद आएं देश के सामने और सरकार से कहें कि मेरी जांच करा ली जाए, वरना देश में गलत संदेश जाएगा। वैसे आपका ग्राफ अब इतना नीचे आ चुका है कि आज देश में सर्वे करा लिया जाए तो प्रियंका गांधी जैसी बेटी को सब स्वीकार करेंगे, मैं भी। लेकिन आप जैसे दामाद के बारे में लोग सौ बार सोचेंगे। इसलिए आप अपनी जांच के लिए खुद पहल करें और आगे आएं।  


एक जरूरी सूचना :-

मित्रों आपको पता है कि मैं इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडा हूं। दिल्ली में रहने के दौरान सियासी गलियारे में जो कुछ होता है, वो तो मैं सबके सामने बेबाकी से रखता ही रहता हूं और उस पर आपका स्नेह भी मुझे मिलता है। अब लगता है कि आप में से बहुत सारे लोग टीवी न्यूज तो देखते हैं, लेकिन इसकी बारीकियां नहीं समझ पाते होगें। मैने तय किया है कि अब आपको मैं टीवी फ्रैंडली बनाऊं। मसलन टीवी के बारे में आपकी जानकारी दुरुस्त करुं, गुण दोष के आधार पर बताऊं कि क्या हो रहा है, जबकि होना क्या चाहिए। इसमें मैं आपको इंटरटेंनमेंट चैनल को लेकर भी  उठने वाले सवालों पर बेबाकी से अपनी राय रखूंगा। मेरी नजर प्रिंट मीडिया पर भी बनी रहेगी। इसके लिए मैने  एक नया ब्लाग बनाया है, जिसका नाम है TV स्टेशन ...। इसका URL है।   http://tvstationlive.blogspot.in । मुझे उम्मीद है कि मुझे इस नए ब्लाग पर भी आपका स्नेह यूं ही मिता रहेगा।    


Wednesday, October 3, 2012

मजा नहीं देती पुरानी महिला : श्रीप्रकाश

आज सुबह कुछ आईएएस अफसरों का फोन आया, कहने लगे हमारे एक आईएएस साथी पर सिर्फ आरोप है कि उसने ट्रेन में एक महिला के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की तो आपने अपने ब्लाग पर उसकी तस्वीर डाल दी और केंद्रीय कोयलामंत्री श्रीप्रकाश ने देश ही नहीं दुनिया भर की महिलाओं की इज्जत उछाल दी तो आप खामोश हैं। दरअसल ये बात सच नहीं  है। सच ये है कि कुछ आफिस और घर के काम में इतना उलझा हूं कि समय नहीं मिल पाया । कल ही मुझे अपने दूसरे ब्लाग "आधा सच" पर अरविंद की नई पार्टी के बारे  में अपनी राय देनी पड़ी, फिर आईएएस अफसर की करतूत सामने आ गई। 

चलिए आपको अपने कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के बारे में भी जानकारी दे दूं। कोयला मंत्री ने एक सार्वजनिक सभा में कहाकि "  महिला जब पुरानी हो जाती है तो मजा नहीं  देती " । इस बयान की जितनी भी निंदा की जाए वो कम है। व्यक्तिगत  रुप से मेरा मानना है कि ऐसा मंत्री पद पर नहीं पृथ्वी पर रहने लायक नहीं है। 

मेरा सवाल है कि क्या श्रीप्रकाश जायसवाल के इस बयान से कांग्रेस पार्टी भी सहमत है ? अगर नहीं तो श्रीप्रकाश जायसवाल इस बयान के 24 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी पार्टी और पद पर कैसे बने हुए हैं ?

दूसरा सवाल अगर श्रीप्रकाश जायसवाल अपना व्यक्तिगत अनुभव जनता के साथ शेयर कर रहे थे तो क्या उनके  घर उनकी पत्नी अभी भी  बनी हुई है ? अगर बनी हुई हैं तो क्या वह अपने पति के बयान से सहमत हैं ?

कांग्रेस की अध्यक्षा खुद महिला हैं। एक सवाल उनसे भी पूछना चाहता हूं। सोनिया जी मैंने देखा था जब संसद में महिला आरक्षण बिल पास नही हो पाया तो सच में आप दुखी थी । आपको इस बात की पीड़ा थी कि आधी आबादी को उसका  हक दिलाने  में आप कामयाब  नहीं हो पा  रही हैं। लेकिन आपका एक मंत्री जो विवादित है कोल ब्लाक आवंटन में, उसकी इतनी घटिया बात को आप सुनकर कैसे नजरअंदाज कर सकती हैं ? 

महिलाओं को आप आरक्षण मत दिलाइये, वो इतना  सक्षम हैं कि खुद चुनाव जीत कर संसद मे आ जाएंगी, लेकिन महिलाओं के साथ राक्षसी सलूक करने वालों के साथ मत खड़ी होइये। 

कानपुर की महिलाएं इस मंत्री के खिलाफ सड़कों पर  है, महिला आयोग ने मंत्री के करतूत की सार्वजनिक रूप  से निंदा की है। महिला आयोग ने इस मामले में प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप  करने को कहा है। अब देश के महिलाएं आपकी ओर देख रही हैं कि ऐसे मंत्री के खिलाफ आप  क्या कार्रवाई करती हैं। वरना  देश की महिलाओं को लगेगा कि श्रीप्रकाश  ने  जो बात कही है,  उसको कांग्रेस का समर्थन हासिल  है, यानि पार्टी भी मानती है कि ज्यादा उम्र की महिलाएं मजा नहीं देतीं। 

हां आपको बता दूं  श्रीप्रकाश  ने  आज कहा है कि अगर उनकी बात महिलाओं को ठीक नहीं लगी है तो उन्हें खेद है। 



Tuesday, October 2, 2012

इस IAS को पहचान लो !

आपको पता है लखनऊ मेल वीआईपी ट्रेन कही जाती है। इसमें ज्यादातर बड़े नेता और हुक्मरान ही सफर करते मिलते हैं। एसी फर्स्ट और एसी टू में सामान्य लोगों को बर्थ मिलना बहुत मुश्किल है। ऐसे में जब सुबह सुबह खबर मिली की एक आईएएस अफसर ने चलती ट्रेन में लड़की के साथ दुराचार करने की कोशिश की,  तो पहले यकीन नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद मैने कुछ लोगों से बात की तो पता चला कि हां ये बात सही है।
मां के साथ सफर कर रही एक लड़की के साथ आइएएस अधिकारी शशिभूषण  ने सोमवार सुबह दुराचार का प्रयास किया। ये देख बेचारी मां तो बिल्कुल घबरा गई और उसके शोर मचाने पर आईएएस भागकर बगल की एसी फर्स्ट बोगी में छिप गया। बहरहाल ट्रेन में चल रहे रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के सुरक्षा दस्ते ने दिलेरी दिखाई और बदमाश आईएएस को पकड़कर लखनऊ में जीआरपी के हवाले कर दिया। लेकिन सच तो ये है कि बदमाशों की पहुच बहुत दूर दूर तक होती है। उनके खिलाफ कार्रवाई हो सके, ये इतना आसान नहीं है। अब देखिए ट्रेन सुबह सात बजे के करीब लखनऊ पहुंच गई। इसके साथ ही ये मामला भी जीआरपी के पास आ गया।
शिकायतकर्ता लड़की भी मौजूद है और बदमाश आईएएस भी। लेकिन पुलिस भी तो बदमाशों के पाले में खड़ी रहती है, लिहाजा उसे रिपोर्ट दर्ज कराने में पांच घंटे लग गए। बताया गया कि आरोपी आइएएस अधिकारी की पैरवी के लिए भी यहां कई लोग सक्रिय हो गए । थाने में आरोपी आईएएस ने बताया कि रास्ते में लगेज महिला की बर्थ पर गिर गया था। उसे उठाने गया था। फिर महिला ने पहले उसका नाम पूछा, नाम से उसे पता लगा कि मैं अनुसूचित जाति का हूं तो वह चिढ गई और अभद्रता का आरोप लगा दिया। हंसी आती है पढे लिखे आईएएस पर । अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए ये बता रहा है कि मेरी जाति से वो नाराज हो गई। भाई जाति से आरक्षण लेते रहो, अब ये क्या बात है कि दुष्कर्म का आरोप लगे वहां भी जाति को आगे कर मुकदमा दर्ज होने से छूट पाने की कोशिश करो। बहरहाल पहली बार लगा कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव फैसला कर लेते हैं, उन्होंने कई घंटे तक मामला दर्ज न करने पर नाराजगी जताई। इसके बाद अफसरों ने इंस्पेक्टर अनिल राय को निलंबित कर दिया। रेलवे कोर्ट ने दुराचार के आरोपी आईएएस को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।